'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अब बनेगा एक आंदोलन

नयी दिल्ली (वीएनआई) दृश्य एक -  चहल-पहल भरी महानगर की एक सुबह। घर में गजल गायक जगजीत सिंह की गायी गजल का रिकार्ड बज रहा है, "सूरज ठेकेदार सा सबको बांटे काम" भाई को कॉलेज के लिये तैयार होते देख निशा लगातार सोच रही हैआखिर मैं क्यों नही जाती कॉलेजमां उसे जल्दी से भाई का कॉलेज बैग लाने के लिये कहती हैअनमनी सी वह थके कदमों से जाती है और एक फीकी सी मुस्कान के साथ बैग भाई को थमा देती हैऔर इस सारे मंजर को झाड़ू लगाते-लगाते ध्यान से देख रही है, घर में सफाई का काम करने वाली छोटीयह सब देख उसे अपने घर की सुबह याद आ रही है जब मां ने छोटे भाई को तो तैयार हो स्कूल जाने के लिये कहा और उसे जल्दी से घर का काम निबटा कर मेम साब के यहां सफाई के लिये भेज दिया। निशा और छोटी दोनों समाज के अलग-अलग तबकों की बेटियांलेकिन दोनों के मन में सवाल एक से- इस सूरज ने उन्हें अपने भाईयों के तरह पढ़ने का काम क्यों नही दिया। निशा को कॉलेज की पढाई की इजाजत नहीं दी गयी और छोटी के नन्हे कदमों को स्कूल की तरफ कदम बढाने ही नही दिये गये और वो लाचार और वह बस लालची नजरों से आते-जाते स्कूल जाते बच्चों को देखती रही...

दृश्य- दोहरियाणा का एक छोटा सा गांवदूर केरल से इस गांव मे "ब्याह" के नाम पर लाई गई उषा अपनी अजन्मी बिटिया की जिंदगी को लेकर पथराई सी आखों से काम तो खेत में कर रही है लेकिन मन में बंवडर मचा हुआ है,सास और पति ने धमकी दी है अगर इस बार भी लड़की हुई तो इस बार  भी वही हश्र होगा जो पिछली बार हुआ था। उस वक्त एक टेस्ट में उसके गर्भ में बिटिया का पता लगते ही सास और पति ने उसे गर्भ में ही मरवा दिया था, लेकिन उषा इस बार किसी भी कीमत पर अजन्मी बिटिया की जान बचाना चाहती हैचाहती हैसास और पति से चीख-चीख कर पूछना कि इस बार तो "शादी" के नाम पर लड़की लाने केरल जाना पड़ालेकिन अगर लड़कियों की जिदंगियों को यूं ही खतम करते रहे तो कहीं भी लड़की नहीं मिलेगीलड़की नहीं रही तो संसार कैसे चलेगालेकिन सवालों का बंवंडर उसके मन में ही उमड़-घुमड़ रहा हैहिरणी सी भयभीत वह लगातर सोच तो रही है लेकिन शब्द जबान पर आ ही नहीं पा रहे हैं...
जी, ये भद्दी और घृणित सच्चाई आज की हैऔर हमारे आस पास की ही है। भले ही हम सब यह सुनते हुए बड़े हुए हों कि स्त्री देवी हैबेटियां पूजनीय हैंलेकिन अब भी काफी जगह चाहे महानगर हो या सुदूरवर्ती गांव, सच्चाई कुछ और ही है। बेटियों को पूजने की बात कहने वाले हमारे समाज में आज भी बड़ी संख्या में बेटियां मां के गर्भ में ही मारी जाने लगीं हैं। कितने ही लड़कियां स्कूल जाने को तरसती हैंस्कूल की इमारत में जाना उनकी हसरत ही रह जाती है। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ’  को एक आंदोलन की तरह चलाने का मन बनाते हुए इसे अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को हरियाणा के पानीपत से इस अभियान या यूं कहें इस आंदोलन का शंखनाद होगा। यह योजना प्रारंभ में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऐसे 100 चुनिंदा जिलों में एक राष्ट्रीय अभियान के जरिए कार्यान्वित की जाएगीजहां बालक-बालिकाओं का अनुपात बेहद कम है। खास बात यह है कि बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ हरियाणा से ही इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इसी राज्य में बालक-बालिका अनुपात सबसे कम यानी सर्वाधि‍क खराब है। कन्या भ्रूण हत्या’ जैसी घटनाएं  बदस्तूर जारी हैं और इस पाप के लिये कोई और नहींबल्कि‍ इन अजन्मी बेटियों के नासमझ माता-पिताइनके अपने ही जिम्मेदार हैं। कुछ चंद सिक्कों की खातिर डॉक्टरी के नाम पर कसाई का काम कर रहे शिक्षितझोला छाप डॉक्टरघरेलू तरीकों से इन अजन्मी बच्चियों की जान ली जा रही है। कानून के बावजूद गांव, देहात और छोटे कस्बों, जगह-जगह ऐसे विज्ञापन आम नजर आते हैं कि हमारी मशीनें फट से बता देंगी कि गर्भ में लड़का है या लड़की और हम सब जानते ही हैं कि गर्भ में बिटिया का पता लगने पर उस काम-तमाम करने के इंतजाम भी वहां हैं।
झांसी की रानी, इंदिरा गांधीकल्पना चावला, किरण बेदी,  बच्छेन्द्री पॉलमहादेवी वर्मा, इसरो की महिला वैज्ञानिक,ऐश्वर्या रॉय बच्चनकिरण शॉ मज़ुमदारफातिमा बीबी, सानिया मिर्जासानिया नेहवालचंदा कोचर और लता मंगेशकर जैसी भारतीय समाज को गर्व से भर देने वाली महिलाओं के बावजूद यह स्थिति बेहद दुखद... इस बात को शायद लोग भूल जाते हैं कि बेटियां भी अपने माता-पिता का नाम रोशन करती हैं और वक्त आने परखासकर बुढ़ापे में उनका सहारा भी बन सकती हैं। निष्ठुर सोच वाले ये भी नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर बेटियां कम हो गईं तो वे अपने बेटों के लिए बहनें और बहुएं कहां से लाएंगे। सरकारीगैर सरकारी तौर पर इस घृणित बुराई को रोकने के प्रयासो के बावजूद कन्या भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’  को अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। जिसका आगाज खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को हरियाणा के पानीपत से करेंगे। यह योजना प्रारंभ में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऐसे 100 चुनिंदा जिलों में एक राष्ट्रीय अभियान के जरिए कार्यान्वित की जाएगीजहां बालक-बालिकाओं का अनुपात बेहद कम है। खास बात यह है कि बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ हरियाणा से ही इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इसी राज्य में बालक-बालिका अनुपात सबसे कम यानी सर्वाधि‍क खराब है।
 इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालक-बालिका’ अनुपात बढ़ाना है। बालक-बालिका अनुपात (सीएसआर) से यह पता चलता है कि किसी भी राज्य या शहर अथवा देश में हर 1000 बालकों के अनुपात में कितनी बालिकाएं हैं। एक दुखद सच यह है कि कन्या भ्रूण हत्या की निर्मम घटनाओं के चलते भारत में यह अनुपात लगातार घटता जा रहा है। वर्ष1991 में हर 1000 बालकों पर 945 बालिकाएं थींलेकिन वर्ष 2011 में हर 1000 बालकों पर 918 बालिकाएं ही थीं।  आंकड़े बयान करते है कि इस दौरान हरियाणा में सबसे कम  यानि 877 महिलायें जबकि केरल में सर्वाधिक यानि1000 के पीछे 1084 महिलायें हैं। आधिकारिक सूत्रो के अनुसार इस स्थिति में सुधार लाने के लिये मोदी सरकार के अन्य महत्वाकांक्षी कार्यक्रम - "स्वच्छता अभियान", "नमामि गंगे" और "मेक इन इंडिया" अभियान की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटियों को उनका हक दिलाने के लिए यह अभियान शुरू कर रहे हैं ताकि उन के साथ भेदभाव खत्म करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने का ठीक दिशा में तेजी तथा प्रभावी कदम उठा कर बेहतर आज और कल बनाया जा सके। सूत्र बताते है कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर उन्होनें बेटियों के साथ भेदभाव खत्म करने और समानता का माहौल बनाने की अपील करते हुए इस बारे में लोगों से सुझाव मांगे थे। इन सुझावों के आधार पर सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ’ अभियान को अंतिम रूप दिया है। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालयमानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त पहल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार यह योजना लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने और उन्हें सुरक्षा मयस्सर करने पर भी केंद्रित होगी। इस दुनिया में अपना पहला कदम रखने के लिए तैयार बच्चि‍यों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें शिक्षि‍त कर अपनी जिंदगी में आने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करने लायक बनाना बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ योजना इस योजना का उद्देश्य है। देश भर में जन अभियान के माध्यम से सामाजिक मानसिकता को बदल कर और इस विषम विषय पर जागरूकता पैदा करके इस योजना को सफल बनाने की कोशि‍श की जाएगी। इसमें लड़कियों एवं महिलाओं से किए जा रहे भेदभाव को समाप्त करने पर भी जोर दिया जाएगा। बालक-बालिका अनुपात में बेहतरी को सुशासन के एक प्रमुख विकास संकेतक के तौर पर शामिल करना भी इसका एक उद्देश्य है। इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके। 
सूत्रों ने बताया कि हरियाणा के पानीपत से शुरू होने वाले इस अभियान में सभी प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों के चुनिंदा शहरों को शामिल किया जाएगा। बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत से पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रलय ने पानीपत में इस विषय पर दो दिन की कार्यशाला भी आयोजित की है। इस कार्यशाला में हिस्सा लेने के लिए गुजरातराजस्थान और पश्चिम बंगाल की महिला मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला में प्रधानमंत्री कार्यालय अभियान से जुड़े तीनो  केन्द्रीय मंत्रालयो के केन्द्रीय मंत्रीहरियाणा के मुख्य मंत्री सहित और नीति आयोग के अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
 महिला पुरूष अनुपात दर की निराशाजनक तस्वीर के बाद अब जरा जानें महिला साक्षरता की तस्वीरवहां भी तस्वीर निराशाजनक है। 2011 मे महिला साक्षरता दर 65.46% तथा पुरुष साक्षरता दर 82.14% दर्ज की गयी है। बिहार में यह दर सबसे कम यानि 46.40% उत्तर प्रदेश में 51.36%, हरियाणा में 56.91% तथा राजस्थान में 47.76% है। खुशी की बात यह है कि केरल में महिला साक्षरता दर 100 यानि शत प्रतिशत है। सूत्रों के अनुसार इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके। 
बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ अभि‍यान के  मुख्य बिंदु :
·        सभी ग्राम पंचायतों में गुड्डा-गुड्डी बोर्ड लगाए जाएंगे। हर महीने इस बोर्ड में संबं‍धि‍त गांव के बालक-बालिका अनुपात को दर्शाया जाएगा। 
·        ग्राम पंचायत हर लड़की का जन्म होने पर उसके परिवार को तोहफा भेजेगी। 
·        ग्राम पंचायत साल में कम-से-कम एक दर्जन लड़कियों का जन्मदिन मनाएगी।  
·        सभी ग्राम पंचायतों में लोगों को बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ की शपथ दिलाई जाएगी।
·        किसी गांव में अगर बालक-बालिका अनुपात बढ़ता हैतो वहां की ग्राम पंचायत को सम्मानित किया जाएगा। 
·        बाल विवाह के लिए ग्राम प्रधान को जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
·        कन्या भ्रूण हत्या रोकने के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों को अभियान में शामिल किया जाएगा। 
बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के तहत 100 जिलों के चयन/पहचान का तरीका/नियम कुछ इस तरह से किया जाएगा : 
क).  23 राज्यों /केंद्र शासित प्रदेशों में 918 के राष्ट्रीय औसत बालक-बालिका अनुपात वाले 87 जिले चुने जाएंगे। 
ख). 918 के राष्ट्रीय औसत बालक-बालिका अनुपात से ज्यादालेकिन गिरावट का रूझान दर्शा रहे जिले चुने जाएंगे। 
ग). इसी तरह 918 के राष्ट्रीय औसत बालक-बालिका अनुपात से ज्यादालेकिन इसमें बढ़ोतरी का रूझान वाले 5जिले चुने जाएंगे। माना यह जा रहा है कि इससे देश के अन्य भागों में स्थि‍त जिले भी इन चुनिंदा जिलों से सीख ले सकेंगे। 
इस अभियान के तहत सम्बद्ध तीनो मंत्रालयो की भूमिका भी तय की गयी है-
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय : आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्भावस्था के पंजीकरण को प्रोत्साहित करनाभागीदारों को प्रशिक्षित करनासामुदायिक लामबंदी और आपसी संवाद को बढ़ावा देनाबालक-बालिका अनुपात को कम करने के अभियान में जुटे  "चैंपियनों" को शामिल करनाअग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं एवं संस्थानों को मान्यता और पुरस्कार देना।
स्वास्थय एवं परिवार कल्या‍ण मंत्रालय : गर्भधारण पूर्व और जन्म पूर्व जांच तकनीकों पर कड़ी नजर रखनाअस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देनाजन्म पंजीकरणनिगरानी समितियों का गठन करना। 
मानव संसाधन विकास मंत्रालय : लड़कियों का पंजीकरणस्कूलों में लड़कियों की ड्रॉप आउट दर में कमी लाना,विद्यालयों में लड़कियों के अनुरूप मानक बनानाशिक्षा के अधिकार अधिनियम पर सख्ती से अमल करनास्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय बनाने पर विशेष ध्यान देना।
बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ’ यानी बेटियों का उनका हक दिलाने वाला अभि‍यान निश्चि‍त रूप से एक जनहित और राष्ट्रहित क्रांति है। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बालिकाओं के साथ भेदभाव खत्म करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने का आह्वान कर चुके हैं। प्रधानमंत्री का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हमें अपनी बेटियों की उपलब्धियों का जश्न मनाना चाहिए क्योंकि वे पढ़ाई से लेकर खेल के मैदान तक बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने पर बल देते हुए कहा कि इसे बहुत ही शर्मनाक और गंभीर चिंता का विषय बताया तथा इस बुराई को समाप्त करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की है। 
बालिका के सशक्तिकरण पर केंद्रित महत्वपूर्ण योजना 'बेटी बचाओबेटी पढ़ाओपर केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उल्लेख वित्त वर्ष 2014-15 के बजट में किया गया है। 
हालांकि,  'बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ'  योजना के आलोचकों की भी कोई कमी नहीं है। इन लोगों का कहना है कि इस योजना को सफल बनाने के लिए मामूली रकम के बजाय भारी-भरकम धन का आवंटन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या करने वालों पर ज्यादा-से-ज्यादा सख्ती बरतने की भी जरूरत हैताकि अन्य लोगों के मन में भय पैदा हो। जाहिर हैइसके लिए एक कड़ा कानून बनाना होगा। इसी तरह गर्भधारण पूर्व और जन्म पूर्व जांच तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करने वाले डॉक्टरों पर भी कड़ाई से लगाम कसने की जरूरत है। इसके अलावा स्कूली शि‍क्षा के दौरान ही बालिकाओं के साथ समानता का भाव बालकों के जेहन में पैदा करने की कोशि‍श की जानी चाहिएतभी आगे चलकर वे उनके साथ भेदभाव करने से बच सकेंगे। यही नहींइसका फायदा उनकी नई पीढ़ी को भी मिलेगा। 
इनका कहना है कि बालिकाओं के खि‍लाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर निश्चि‍त तौर पर सुनियोजित तरीके से कदम उठाने पड़ेंगे। पैसे की भारी किल्लत के साथ अन्य कष्ट उठाकर भी अपनी बेटियों की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आर्थि‍क दृष्टि‍ से सक्षम बनाने वाले माता-पिता को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की भी आवश्यकता है,ताकि वे समाज के अन्य लोगों के लिए नजीर बन सकें और संकुचित सोच वाले लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। इसके साथ ही बहादुरी के कारनामे दिखाने वाली लड़कियों को भी सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही बालिकाओं एवं महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गौर करने और उनके लिए विशेष सरकारी एवं निजी अस्पताल खोले जाने की भी जरूरत है। इसी तरह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन भी अभी से ही करना जरूरी है। इन सब का भी सकारात्मक असर हमारे समाज पर अवश्य पड़ेगा और आगे चलकर लड़कियों एवं महिलाओं के साथ समानता का भाव लोगों के मन में पैदा होगा। उम्मीद की जानी चाहिये कि 'बेटी बचाओबेटी पढ़ाओके प्रभावी अभियान से सूरज ठेकेदार सा निशा और छोटी को भी पढ़ने का काम सौंपेगा और उषा की अजन्मी बिटिया सूरज की रोशनी देखने इस दुनिया में कदम रखेगी और पढ़-लिख कर सूरज ठेकेदार उसे भी कोई अच्छा काम काज सौंपेगा। आमीन...
*शोभना जैन ऑनलाइन हिंदी न्यूज़ एंड फीचर सर्विसेजविज़न न्यूज़ ऑफ़ इंडिया की एडिटर-इन-चीफ हैं
SOURCE - PIB

Follow by Email

Google+ Followers

Daily Horoscopes