मातृ-शिशु देखभालः स्वास्थ्य मंत्रालय प्रसव-पूर्व और प्रसव के बाद देखभाल के लिए प्रौद्योगिकी का अभिनव उपयोग कर रहा है

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत माताओं और बच्चों को प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय प्रौद्योगिकी का अभिनव इस्तेमाल कर रहा है।
मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस)
     सभी गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रसव-पूर्व व प्रसव के बाद सेवाएं प्रदान करने तथा सभी बच्चों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2010 में सभी राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों में एक वेब आधारित प्रणाली लागू की जिसे मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) के नाम से जाना जाता है। यह सभी गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष तक के बच्चों के व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि दर्ज करता है। अब तक 2.24 लाख सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) और 9.31 लाख मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) द्वारा कुल 14 करोड़ से भी ज्यादा गर्भवती महिलाओं को एमसीटीएस में पंजीकृत किया गया है। एमसीटीएस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी गर्भवती महिलाओं को पूर्ण और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व और प्रसव के बाद देखभाल सेवाएं प्राप्त हों और सभी बच्चों को टीकाकरण सेवाओं की पूरी श्रृंखला मिल रही है। एमसीटीएस के तहत लाभार्थियों को उपयुक्त स्वास्थ्य जागरुकता संदेश उनके मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं। ये संदेश गर्भावस्था या बच्चे की जन्मतिथि के आधार पर समय समय पर लाभार्थियों को भेजे जाते हैं।

      एमसीटीएस के डाटा आधार को एएनएम द्वार मोबाइल फोन के जरिए उन्नत बनाने के लिए अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंटरी सर्विसेस डाटा (यूएसएसडी) आधारित एक प्रणाली शुरू की गई है। एक टैबलेट आधारित प्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके जरिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता पंजीयन कार्य और प्रदत्त सेवाओं से संबंधित सूचना उपलब्ध कराने का काम टैबलेट के जरिए कर सकेंगे। इससे समय पर पंजीयन, सटीक सूचनाएं उपलब्ध कराने और सूक्ष्म-योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। सही पहचान व रिकार्ड तैयार करने के लिए इसे 'आधार' के साथ जोड़ने की भी योजना बनायी जा रही है। एक स्व-पंजीयन वेब पोर्टल भी जल्द शुरू किया जाएगा जहां लाभार्थी उनसे संबंधित एएनसी, पीएनसी आदि के विवरण देख सकेंगे।
मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग फैसिलिटेशन सेंटर (एमसीटीएफसी)
      इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान (एनएचएफडब्ल्यू) में मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किया है। मातृ-शिशु को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उठाया गया यह एक बड़ा कदम है।
एमसीटीएफसी में 86 सीटें हैं और इसका निम्न उद्देश्य हैः
            I.        एमसीटीएस को एक सहायक तंत्र उपलब्ध कराना और गर्भवती महिलओं, बच्चों के माता-पिता और स्वास्थ्यकर्मियों को फोन करके इसमें दर्ज की गई सूचनाओं की वैधता पता लगाना।
         II.        गर्भवती महिलाओं, बच्चों के माता-पिता और सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों को समय-समय पर उपयुक्त सूचनाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना ताकि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जा सके। साथ ही सही स्वास्थ्य आचरण और प्रचलनों को बढ़ावा देना।
       III.        विभिन्न मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, जेएसएसके, जेएसवाई, आरबीएसके, नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव (एनआईपीआई) जैसे केन्द्रीय योजनाओं और  आशाओं द्वारा गर्भनिरोधकों का वितरण के संबंध में सेवादाताओं और सेवा प्राप्तकर्ताओं से संपर्क कर उनसे फीडबैक लेना। आसानी और शीघ्रता से योजनाओं की प्रभावशीलता के मूल्यांकन में ये फीडबैक भारत सरकार और राज्य सरकारों के लिए मददगार होंगे। इससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने में भी मदद मिलेगी।
      IV.        आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं से आवश्यक दवाओं, ओआरएस पाकेटों और गर्भनिरोधकों की उपलब्धता जांचना।
किलकारी
     "किलकारी" के नाम से एक आईवीआरएस आधारित एप्लीकेशन पायलट तौर पर शुरु की गई है जिसके तहत मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित ऑडियो संदेश गर्भवती महिलाओं और शिशु के माता-पिता को भेजे जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और शिशु के माता पिता को प्रोत्साहित करने और उन्हें जागरुक बनाने के लिए 18 संदेशों की श्रृंखला तैयार की गई है, जिन्हें गर्भवस्था के प्रत्येक चरण और शिशु की उम्र के आधार पर विशेषकर उनके जरुरतों के मुताबिक पेशेवर ढंग से सरल हिंदी भाषा  में रिकार्ड किए गए हैं। इन ऑडियो संदेशों को मोबाइल के जरिए लाखों लाभार्थियों विशेषकर उच्च फोकस वाले राज्यों के प्राथमिकता वाले जिलों में रहने वाले गर्भवती महिलाओं और बच्चों के माता-पिताओं को भेजे जाएंगे। एक अन्य आईवीआरएस आधारित एप्लीकेशन 'मोबाइल अकादमी' को भी आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए जांचा-परखा जा चुका है। इन एप्लीकेशनों को 15 अगस्त, 2015 को राष्ट्रीय स्तर पर लाँच किया जाना प्रस्तावित है। इनका मकसद जागरुकता फैलाना, गर्भवती महिलाओं और माता-पिताओं को बेहतर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करना है।
SOURCE - PIB

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