राष्ट्रीय कृषि विकास योजना Rashtriya Krishi Vikas Yojana


कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा ताजा प्रयासों और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि विकास रणनीतियों के बीच समन्वय कायम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) ने 29 मई 2007 को एक प्रस्ताव लागू किया था। इसका लक्ष्य 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि क्षेत्र में 4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर कायम करना था। इसके लिए वर्ष 2007-08 के दौरान 25,000 करोड़ रुपए की लागत से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) नामक एक नई योजना शुरू की गई थी, जो कृषि और संबंधित क्षेत्रों में राज्यों को अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता (एसीए) प्रदान करने के लिए थी।
इस योजना के अधीन राज्यों के लिए यह आवश्यक है कि वे ऐसी बुनियादी सुविधाओं के सृजन के लिए जिला और राज्य कृषि योजनाओं को तैयार करें, जो अपेक्षाकृत अधिक उत्पादन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मौजूदा उत्पादन परिदृश्य में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने के लिए अनिवार्य हो। राज्यों को अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता के रूप में शत-प्रतिशत अनुदान पलब्ध कराये जाते हैं।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के मार्गनिर्देशों में जिला/राज्य स्तर पर कार्यान्वित विभिन्न कार्यक्रमों का जिला कृषि योजना और राज्य कृषि योजना के रूप में विलय और समन्वय करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। प्रत्येक जिले के लिए एक जिला कृषि योजना तैयार करना आवश्यक होता है जिसमें पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि, स्वर्णजयंती ग्राम स्वराज योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, भारत निर्माण जैसी मौजूदा जिला, राज्य अथवा केन्द्रीय योजनाओं और अन्य योजनाओं से उपलब्ध संसाधनों को शामिल किया जाता है। जिला कृषि योजनाएं सामान्य रूप से मौजूदा योजनाओं का समग्र रूप नहीं होती हैं किंतु इसका उद्देश्य जिले का कृषि और संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यकताओं का आकलन करना है। ये योजनाएं जिले के कुल मिलाकर विकास परिदृश्य में कृषि और संबंधित क्षेत्रों के लिए एक दृष्टिकोण पेश करती हैं। जिला कृषि योजनाओं से व्यापक तौर पर कृषि विकास के लिए वित्तपोषण के स्रोतों और वित्तीय आवश्यकताओं का पता चलता है। जिला कृषि योजना में पशुपालन और मछली पालन, लघु सिंचाई परियोजनाएं, ग्रामीण विकास के कार्य, कृषि विपणन योजनाएं और जल संभरण तथा संरक्षण से संबंधित योजनाएं शामिल हैं। इसमें प्रत्येक जिले में प्राकृतिक संसाधनों और प्रौद्योगिकीय संभावनाओं का ध्यान रखा जाता है। इसके बाद प्रत्येक राज्य के लिए जिला कृषि योजनाओं को एक साथ मिलाकर एक व्यापक राज्य कृषि योजना तैयार करना जरूरी होता है। राज्य उन स्रोतों का संकेत देते हैं, जिसे राज्य से जिले तक भेजा जा सकता है।
12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान तीन प्रकार से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए वित्तपोषण किया जाएगा, जिसमें उत्पादन वृद्धि (35 प्रतिशत), आधारभूत सुविधाएं और संसाधन तथा उप-योजनाएं (20 प्रतिशत) शामिल हैं। शेष 10 प्रतिशत धनराशि का प्रावधान लोचशील निधि के रूप में किया जाएगा जिसे राज्य या तो उत्पादन वृद्धि अथवा आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों से जुड़ी परियोजनाओं से कर सकते हैं। यह राज्यों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर आधारित है। बढ़ते निवेश संबंधित जरूरतों को देखते हुए सरकार ने हाल में उत्पादन के लिए 35 प्रतिशत आवश्यकताओं का रास्ता खोल दिया है जिससे आधारभूत निर्माण और संसाधनों के लिए शत-प्रतिशत आवंटन करना संभव हो पाया है।
राज्यों को योजनाओं के चयन, आयोजना, मंजूरी और कार्यान्वयन की प्रक्रिया में लोचशीलता और स्वायत्तता दी गई है ताकि वे अपने प्राथमिकताओं और कृषि-जलवायु संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार निवेश कर सकें और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। राज्य सरकारों की परियोजनओं की मंजूरी संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मंजूरी समिति द्वारा की जाती है। राज्य कृषि विभाग के माध्यम से धन भेजा जाता है, जो इस योजना के लिए शीर्ष विभाग है।
फिलहाल 2014-15 के दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अधीन उप-योजनाओं के रूप में छः उप-योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। ये उप-योजनाएं और उनके लिए आवंटन निम्नानुसार हैं:-
                        i.           पूर्वोत्तर क्षेत्र में हरित क्रांति लानाः- असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़  की चावल आधारित फसल प्रणाली मे सुधार के उद्देश्य से वर्ष 2010-11 में यह कार्यक्रम शुरू किया गया था। इस योजना के लिए 2010-11 और 2011-12 में प्रत्येक के लिए 400 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जिसे 2012-13 और 2013-14 में बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपए कर दिया गया। वर्ष 2014-15 के लिए भी यह आवंटन 1000 करोड़ रुपए है।  
                      ii.           सब्जी क्षेत्रों पर आधारित पहलः सब्जियों की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए इसकी उत्पादकता और बाजार संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया गया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक कारगर आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना आवश्यक था, ताकि अपेक्षाकृत कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सब्जियां उपलब्ध हो सके। इस उप-योजना के लिए 2011-12 और 2012-13 में प्रत्येक के लिए 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। वर्ष 2013-14 में 200 करोड़ रुपए  आवंटित किए गए और वर्ष 2014-15 के लिए 175 करोड़ रुपए किए जा रहे हैं। 
                    iii.           राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक मिशनः- चुनिंदा ब्लॉकों में पशुधन विकास, दूध उत्पादन, सूअर पालन, बकरी पालन और मछली पालन के माध्यम से पशु आधारित प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2011-12 के दौरान 300 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक मिशन की शुरुआत की गई। इस योजना के लिए 2012-13 और 2013-14 के दौरान क्रमशः 500 करोड़ रुपए और 400 करोड़ रुपए आवंटित किए गए तथा 2014-15 में इसके लिए 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
                    iv.           केसर मिशनः भारत सरकार की ओर से 4 वर्षों के लिए 288.06 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता से 2010-11 में यह योजना शुरू की गई थी। इसके लिए 2010-11 में 39.44 करोड़ रुपए, 2011-12 और 2012-13 में प्रत्येक के लिए 50.00 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। इस मिशन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में केसर उत्पादन का आर्थिक पुनर्जीवन करना है। वर्ष 2013-14 में इसके लिए 100 करोड़ रुपए आवंटित किए गए और वर्ष 2014-15 में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
                      v.           विदर्भ सघन सिंचाई विकास कार्यक्रमः- इस योजना की शुरूआत वर्ष 2012-13 में की गई। इसका उद्देश्य संरक्षित सिंचाई के दायरे में और भी अधिक कृषि भूमि को लाना था। वर्ष 2012-13 और 2013-14 में प्रत्येक के लिए 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए और वर्ष 2014-15 में इसके लिए 150 करोड़ रुपए किए गए हैं।
                               vi.          फसल विविधीकरणः- मूल रूप से हरित क्रांति वाले राज्यों के सामने फसल उत्पादन का स्तर कायम रखने और जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन की समस्याएं हैं। इसका समाधान फसलों के विविधीकरण के रुप में देखा जा रहा है। फसल विविधीकरण कार्यक्रम शुरू करने के लिए वर्ष 2013-14 में 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया, ताकि प्रौद्योगिकीय खोज को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को फसलों के विकल्पों को चुनने की दिशा में प्रोत्साहित किया जा सके। इस योजना के लिए वर्ष 2014-15 में 250 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (उप-योनजाओं) सहित 2007-08 से लेकर 2014-15 तक आवंटित, जारी और इस्तेमाल की गई निधि का विवरण निम्नानुसार हैः-
(करोड़ रुपए)
वर्ष
आवंटन
जारी निधि
इस्तेमाल की गई निधि
2007-08
1489.70
1246.89
1246.79
2008-09
3165.67
2886.80
2880.89
2009-10
3806.74
3760.93
3756.53
2010-11
6722.00*
6720.08
6719.02
2011-12
7810.87*
7794.09
7715.24
2012-13
9317.00*
8400.00
8353.30
2013-14
9954.00*
7052.51
6502.43
2014-15
9954.00*
7328.93
(22.12.2014 तक)
2194.03
            

*उप-योजनाओं सहित
    योजना आयोग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के कार्यान्वयन के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में 63,246 करोड़ रुपए के व्यय को मंजूरी दी है। वर्ष 2014-15 के लिए इस योजना के अधीन 9954.00 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाना है।
*श्री घनश्याम गोयल पसूका नई दिल्ली में अपर महानिदेशक (मीडिया और संचार) हैं और श्री सम्राट बंदोपाध्याय पसूका नई दिल्ली में सहायक निदेशक (मीडिया और संचार) हैं  
***
                                                                                                       *श्री घनश्याम गोयल
*श्री सम्राट बंदोपाध्याय
          *Shri Ghanshyam Goel
                                                                                                            **Shri Samrat Bandopadhyay

Pursuant to the resolution adopted on 29-05-2007 by the National Development Council (NDC), to reorient the current agricultural development strategies to meet the needs of the farmers and for fresh efforts by the Central and State Governments to rejuvenate the agricultural sector so as to achieve 4% annual growth during the 11th Five Year Plan, a new State Plan Scheme of Additional Central Assistance (ACA) for agriculture and allied sectors, namely, Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY) was launched during 2007-08 with an envisaged outlay of Rs. 25,000 crore for the Plan period.
It requires the States to prepare District and State Agriculture Plans for creation of such infrastructure, which are essential to catalyse the existing production scenario for achieving higher production. Additional Central Assistance (ACA) is made available to the States as 100% grants. 
The RKVY Guidelines recognize and build on the need for convergence and integration of the various programmes implemented at District/State level into District Agriculture Plans (DAPs) and State Agriculture Plan (SAP). Each district is required to formulate a District Agriculture Plan by including the resources available from other existing schemes, District, State or Central Schemes such as Backward Region Grant Fund (BRGF), Swarnajayanti Gram Swarozgar Yojana (SGSY), National Rural Employment Guarantee Scheme (NREGS), Bharat Nirman and tied and untied grants from the Central and State Finance Commissions etc. The District Agriculture Plans are not to be the usual aggregation of the existing schemes but would aim at moving towards projecting the requirements for development of agriculture and allied sectors of the district. These plans present the vision for agriculture and allied sectors within the overall development perspective of the district. The District Agriculture Plans would reflect the financial requirement and the sources of financing the agriculture development plans in a comprehensive way. The DAP will include animal husbandry and fishery, minor irrigation projects, rural development works, agricultural marketing schemes and schemes for water harvesting and conservation, keeping in view the natural resources and technological possibilities in each district. Each State is further required to prepare a comprehensive State Agricultural Plan (SAP) by integrating the DAPs. The State will have to indicate resources that can flow from the State to the district.
During XII Plan, RKVY funding will be provided through three streams viz. production growth (35%), infrastructure & Assets and sub-schemes (20%). The remaining 10% will be is provisioned as flexi fund from which states can undertake either production growth or infrastructure & assets projects depending upon States needs & priorities.  Looking at the requirement of increasing investment, Government has recently done way with 35% requirement in production stream thus paving the way for 100% allocation in investments for infrastructure buildings & creation of assets.
The States have been provided flexibility and autonomy in the process of selection, planning, approval and execution of schemes to make investments in interventions as per their priorities and agro-climatic requirements so that the outcomes are as envisaged in the RKVY objectives.  The projects of the State Governments are approved by the State Level Sanctioning Committees (SLSCs) under the Chairmanship of Chief Secretary of the respective States.   The funds are routed through the State Agriculture Department, which is the nodal Department for the scheme. 
Presently, six sub-schemes are being implemented as sub-schemes under RKVY during 2014-15. These sub-schemes and their allocations are:-
i.      Bringing Green Revolution to Eastern Region: - This programme was initiated in 2010-11 targeting the improvement in the rice based cropping system of Assam, West Bengal, Orissa, Bihar, Jharkhand, Eastern Uttar Pradesh and Chhattisgarh. Allocation for this scheme in 2010-11 & 2011-12 was Rs. 400 crore each, which has been enhanced to Rs. 1000.00 crore in 2012-13 & 2013-14. The allocation for the year 2014-15 is Rs.1000.00 crore.

ii.      Initiative on Vegetable Clusters: - Growing demand for vegetables was proposed to be met by a robust increase in the productivity and market linkage. For the purpose, an efficient supply chain needed to be established, to provide quality vegetables at competitive prices. The allocation for this sub-scheme was Rs.300.00 crore each in 2011-12 & 2012-13. The allocation for the year 2013-14 was Rs. 200.00 crore and 2014-15 is Rs. 175.00 crore.

iii.     National Mission for Protein Supplements: - National Mission for Protein Supplements was launched with an allocation of Rs.300 crore during 2011-12 to take up activities to promote animal based protein production through livestock development, dairy farming, piggery, goat rearing and fisheries in selected blocks. During 2012-13 & 2013-14 an amount of Rs. 500 crore & Rs. 400.00 crore were allocated for 2014-15, Rs. 300.00 crore has been earmarked for this scheme.

iv.     Saffron Mission: - The Scheme was initiated in 2010-11 with an overall Government of India budgetary support of Rs.288.06 crore over four years. Allocation has been Rs. 39.44 crore in 2010-11, Rs.50.00 crore each in 2011-12 & 2012-13. The mission was meant to bring economic revival of J&K Saffron. Outlay for the year 2013-14 was Rs. 100.00 crore. An amount of Rs.100.00 crore is earmarked for 2014-15.

v.      Vidharbha Intensive Irrigation Development Programme: - The Scheme was initiated in  2012-13  which seeks to bring in more farming areas under protective irrigation. The allocation for the year 2012-13 & 2013-14 was Rs. 300.00 crore each.  For 2014-15 Rs. 150.00 crore has been allocated for VIIDP.

vi.   Crop Diversification: - The original Green Revolution States have the problem of stagnating yields and over-exploitation of water resources. The answer lies in crop diversification. An amount of Rs.500.00 Crore was allocated for 2013-2014 to the start a programme of crop diversification that would promote technological innovation and encourage farmers to choose crop alternatives. For 2014-15 Rs. 250.00 crore has been allocated for this scheme.

The details of funds allocated, released and utilized under RKVY (including sub-schemes) from the year 2007-08 to 2014-15 is as under: -
                                                                                                                                    (Rs in crore)
YEAR
ALLOCATION
RELEASE
UTILIZATION

2007-08
1489.70
1246.89
1246.79
2008-09
3165.67
2886.80
2880.89
2009-10
3806.74
3760.93
3756.53
2010-11
6722.00*
6720.08
6719.02
2011-12
7810.87*
7794.09
7715.24
2012-13
9317.00*
8400.00
8353.30
2013-14
9954.00*
7052.51
6502.43
2014-15
9954.00*
7328.93
(As on 22.12.2014)
2194.03
            


*Including sub-schemes.

            Planning Commission has approved an outlay of Rs.63,246 crore for implementation of RKVY for XII Plan.  For the year 2014-15, allocation under the scheme is Rs. 9954.00 crore.

*Shri Ghanshyam Goel is ADG (M&C), PIB and Shri Samrat Bandopadhyay is Assistant Director (M&C), PIB New Delhi
(PIB Features)


SOURCE - PIB -  वि. कासोटिया/एएम/एसकेएस/डीसी–168  

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