स्‍मार्ट शहरों और एएमआरयूटी योजनाओं के लिए अगले 5 वर्षों में शहरी क्षेत्रों में दो लाख करोड़ रूपए के निवेश की संभावना

चार्ल्‍स कोर्रिया ने कहा था, ''भारत के शहरों में से सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण बात यह है कि यहां हमें विश्‍व प्रसिद्ध शिल्‍पकार मिलते हैं।'' निकट भविष्‍य में भारत के व्‍यापक मानचित्र पर स्‍मार्ट शहरों के उभरने के बाद वह अपने इस धारणा के प्रति और अधिक आश्‍वस्‍त हो गए होते। अफसोस ! उनका देहांत हो चुका है। परियोजना को पूरा करने के लिए व्‍यापक स्‍तर पर तैयारियां चल रही हैं, ताकि विकास एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए इस महत्‍वपूर्ण पहल को साकार रूप दिया जा सके।

केंद्र की ओर से 48,000 करोड़ रूपए के निवेश के साथ अगले 5 वर्षों में 100 स्‍मार्ट शहरों को विकसित किया जाएगा। देश के शहरी क्षेत्र को तीव्र गति से विकसित करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल ने अगले 5 वर्षों में दो नए शहरी अभियानों के अंतर्गत शहरी विकास पर करीब एक लाख करोड़ रूपए के खर्च को स्‍वीकृति दे दी है। क्रमश: 48,000 करोड़ रूपए और 50,000 करोड़ रूपए के परिव्‍यय से इस वर्ष 25 जून तक प्रारंभ की जा रही यह दो परियोजनाएं स्‍मार्ट सिटी अभियान और 500 शहरों के कायाकल्‍प और शहरी बदलाव के लिए अटल अभियान (एएमआरयूटी) हैं।

स्‍मार्ट सिटी अभियान के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में जीवन की शानदार गुणवत्‍ता को समर्थ्‍य बनाने के लिए मूल्‍य बुनियादी सुविधाओं, स्‍वच्‍छ और दीर्घकालिक पर्यावरण और कुशल समाधानों को अपनाने को सुनिश्‍चित करना है। अधिकारियों का दावा है कि स्‍मार्ट शहरी मिशन का उद्देश्‍य अभियान के अंतर्गत उन्‍नत शहरी पर्यावरण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा जिससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और इसे सार्वजनिक स्‍थलों तक पहुंचाने के माध्‍यम से गरीबों को शहरी विकास के लाभ प्रदान करना है।

2011 की जनगणना के अनुसार, शहरी जनसंख्‍या के कुल जनसंख्‍या के 31 प्रतिशत के लिए करीब 37 करोड़ रूपए था। नवीनतम अनुमानों के अनुसार, करीब 5.80 करोड़ शहरी जनसंख्‍या गरीब है। सूत्रों ने बताया कि पिछल सरकार के द्वारा 2005 में शुभारंभ किए और मार्च, 2014 तक कार्याविन्‍त हुए जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण अभियान के कार्यान्‍वय से सबक लेते हुए नवीन पहलों को गठित किया जा चुका है। अमरीकी व्‍यापार विकास एजेंसी (यूएसटीडीए) ने इलाहाबाद, अजमेर, और विशाखापत्‍तन शहरों को स्‍मार्ट शहरो में बदलने के लिए राजस्‍थान और आंध्रप्रदेश सरकारों के साथ एक समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर किए।

चौदह देशों ने स्‍मार्ट शहरों को बनाने में रूचि दिखाई है। इनमें अमरीका, जापान, चीन, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्‍ड, स्‍वीडन, इजरायल, तुर्की और ऑस्‍ट्रेलिया शामिल हैं। अभियान के अतंर्गत, उन्‍नत शहरी वातावरण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा जिससे बढ़े हुए रोजगारों और आजीविका अवसरों के माध्‍यम से गरीबों को लाभ मिलेगा।

स्‍मार्ट शहरी अभियान के अंतर्गत, प्रत्‍येक चयनित शहर को पाँच वर्षो के लिए प्रतिवर्ष 100 करोड़ रूपए की केन्‍द्रीय सहायता प्रदान की जाएगी और मानदंडों के अनुसार प्रत्‍येक राज्‍य आकांक्षी स्‍मार्ट शहरों की निश्चित संख्‍या की संक्षित सूची तैयार करेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आकांक्षी स्‍मार्ट शहरों को एक पारदर्शी ''इस महत्‍वाकांक्षी अभियान के उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से बेहतर प्रदर्शन की संभावनाओं के साथ वित्‍तपोषण के लिए शहरी चुनौती प्रतिस्‍पर्धा'' के माध्‍यम से चुना जाएगा।

केन्‍द्र सरकार से मिलने वाली धनराशि के लिए राज्‍यों की योजना का मूल्‍यांकन किया जाएगा। सूत्रों ने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि स्‍मार्ट शहर अभियान का लक्ष्‍य जीवन स्‍तर में सुधार के लिए उपलब्‍ध परिसम्पत्तियों, संसाधनों और बुनियादी ढांचे का कुशल उपयोग करने के लिए स्‍मार्ट शहरों को अपनाने को प्रोत्‍साहन देना है। शहरी योजना में स्‍थानीय लोगो की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें पुनर्संयोजन, पुनर्विकास, पेन शहरी पहलों और नये शहरों के विकास को शामिल करते हुए क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण के माध्‍यम से कार्यान्वित किया जाएगा।

यूएनआई के एक संवाददाता ने हाल ही में कुछ प्रमुख हिन्‍दी राज्‍यों के क्षेत्रों का दौरा किया तो देखा कि स्‍थानीय लोग स्‍मार्ट शहरों के संभावित स्‍थलों का आंकलन कर रहे है और उन्‍होंने इन क्षेत्रों के अंदर और आसपास भूमि मूल्‍यों में वृद्धि के अपनी स्‍वयं की संभावनाएं तलाश करनी प्रारंभ कर दी हैं। ''यह सिर्फ धन लाभ की गणना नहीं है बल्कि हम बेहतर शहरी जीवन के लिए भी उत्‍सुक है, और यदि हमने एक निर्धारित अवधि के भीतर बेतरतीब विकास की इस वर्तमान परंपरा को नहीं रोका तो आगामी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।'' कुछ स्‍थानों पर स्‍मार्ट शहरों के संभावित स्‍थलों पर शर्ते लगाई जा रही है और स्‍थानीय लोगों में पूर्ण उत्‍साह है। सूचना के अनुसार एक सांविधिक शहर वह है जिसमें एक नगर निगम होता है। 2011 के रिकार्डो के अनुसार, कुल 4,041 सांविधिक शहर/कस्‍बे हैं। इनमें से करीब 500 शहरों की जनसंख्‍या एक लाख से ज्‍यादा है इनमें से प्रत्‍येक को अमरूत के तौर पर देखा गया है। इन 500 शहरों में भारत की जनसंख्‍या का 73 प्रतिशत हिस्‍सा है।

अत्‍यधिक जानकार सूत्रों के अनुसार, स्‍मार्ट शहरों और अमरूत के तौर पर नामांकित हो सकने वाले शहर क्रमश: इस प्रकार हैं: अंडमान और निकोबार (1 और 1), आंध्र प्रदेश (3 और 31), असम (1 और 7), दिल्‍ली (1 और 1), कर्नाटक (6 और 27), केरल (1 और 18), उत्‍तरप्रदेश (13 और 54), पश्चिम बंगाल (4 और 28), महाराष्‍ट (10 और 37), आदि। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चिह्नित क्षेत्रों में पुनर्संयोजन और कमियों को अहमदाबाद की स्‍थानीय योजना की तर्ज पर ही आवश्‍यक सुधारों और हस्‍तक्षेपों के माध्‍यम से हल किया जाएगा। मुबंई के भिंडी बाजार और दिल्‍ली के पश्चिमी किदवई नगर जैसे मामलों में पहले से ही निर्मित क्षेत्र के पुनर्निर्माण के विकास के मामले स्‍मार्ट सिटी के लिए उत्‍तरदायी नहीं होगें।

पैन सिटी शहरों के घटकों में बुद्धिमता से किये गये परिवहन समाधान जैसे सुधार किए जा सकते हैं। स्‍मार्ट शहरों की पहल के योजनाकारों ने इनकी प्रमुख बुनियादी सेवाओं में पर्याप्‍त और स्‍वच्‍छ जलापूर्ति, स्‍वच्‍छता और ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, कुशल शहरी गतिशीलता और सार्व‍जनिक परिवहन, गरीबों के लिए किफायती आवास, बिजली आपूर्ति, मजबूत सूचना-प्रौद्योगि‍की संपर्क, प्रशासन, विशेष रूप से ई-शासन, निवासियों की सुरक्षा, बेहतर तरीके से विकसित स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा सेवाओं के अलावा दीर्घकालिक शहरी विकास को शामिल किया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि स्‍मार्ट शहरी कार्ययोजना को विशेष उद्देश्‍य वाहनों के माध्‍यम से कार्यान्वित किया जाएगा जिसे प्रत्‍येक शहर के लिए बनाया जाएगा और राज्‍य सरकारें इन एसपीवी के संसाधनों को त्‍वरित गति से उपलब्‍ध कराने को सुनिश्चित करेंगी।

स्‍मार्ट शहर और अमरूत दोनों ही एक विशेष माध्‍यम से एक दूसरे से जुड़े हैं। अमरूत में 50,000 करोड़ रूपए के निवेश के माध्‍यम से जलापूर्ति, सीवरेज प्रबंधन, तूफानी पानी का निकास, बच्‍चों की सुवि‍धाओं को पूरा करने के लिए विशेष योजना के साथ परिवहन और हरित क्षेत्रों एवं उद़यानों का विकास शामिल है।



इस अभियान का उद्देश्‍य ई-शासन, पेशेवर नगरपलिका कैडर का गठन, स्‍थानीय शहरी निकायों के लिए विकास कोष और कार्य, भवन उपनियमों की समीक्षा, नगरनिगम करों के संग्रह और मूल्‍यांकन में सुधार, शहरी स्‍थानीय निकायों की ऋण रेंटिग, ऊर्जा और जल ऑडिट, नागरिक केन्द्रित शहरी योजना जैसे सुधारों को प्रा़प्‍त करना है।

सूत्रों ने बताया कि सुधारों को आगे बढ़ाने के क्रम में, सरकार ने पिछले वर्ष के दौरान सुधारों की प्रा़प्ति के आधार पर प्रोत्‍साहन के तौर पर राज्‍यों/ संघशासित प्रदेशों को 10 प्रतिशत बजट आबंटन की भी योजना बनाई है। समयसीमा के साथ एक सुधार प्रक्रिया को दिशा-निर्देशों में राज्‍यों को वितरित की जाएगी।

अमरूत अभियान को एक लाख और इससे ज्‍यादा जनसंख्‍या वाले 500 शहरों और कस्‍बों में कार्यान्वित किया जाएगा। इसे नदियों के किनारे बसे शहरों, कुछ राजधानी शहरों, पहाड़ी, द्वीपों और पर्यटन क्षेत्रों के कुछ महत्‍वपूर्ण शहरों में भी कार्यान्वित किया जाएगा।

जेएनएनआरयूएम से भिन्‍न, केन्‍द्र सरकार व्‍यक्तिगत परियोजनाओं का मूल्‍यांकन करेगी लेकिन सूत्रों ने बताया कि राज्‍यों को चिह्नित शहरों की आवश्‍यकताओं, निष्‍पादन और निगरानी के आधार पर योजनाओं की डिजाइनिंग में लचीलापन अपनाने की सुविधा दी जाएगी। राज्‍य सिर्फ व्‍यापक सहमति के आधार पर केन्‍द्र को अपनी वार्षिक योजना प्रस्‍तुत करेंगे जिनके आधार पर निधि जारी की जाएगी।

10 लाख की जनसंख्‍या वाले शहरों और कस्‍बों के लिए परियोजना लागत की 50 प्रतिशत और 10 लाख की आबादी वाली परियोजना लागत की एक तिहाई केन्‍द्र सरकार द्वारा मदद की जाएगी। निधि को राज्‍य वार्षिक कार्ययोजनाओं में संकेतित महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों के आधार पर 20:40:20 के अनुपात में तीन किश्‍तों में जारी किया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि सरकार पहले से ही जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत स्‍वीकृत और अपूर्ण परियोजनाओं को अमरूत के तहत केन्‍द्रीय वित्‍तपोषण को स्‍वीकृति दे चुकी है। 2005-2012 के दौरान स्‍वीकृत शहरी विकास से संबंधित जेएनएनयूआरएम परियोजनाओं और पचास प्रतिशत तक की प्रगति प्राप्‍त कर चुकी परियोजनाओं और 2012-14 के दौरान स्‍वीकृत परियोजनाओं को मार्च 2017 तक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अनुसार, 102 और 296 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए संतुलन बनाने हेतु केन्‍द्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दो लाख करोड़ रूपए से ज्‍यादा के न्‍यूनतम निवेश को अगले पाँच वर्षो में शहरी क्षेत्रों में लगाया जाएगा जबतक राज्‍य और शहरी स्‍थानीय निकाय 50 से 60 प्रतिशत तक के संसाधनों नहीं जुटा लेते हैं। इसके अतिरिक्‍त, परियोजना लागतों को पूरा करने के लिए आवश्‍यकता के अनुसार सार्वजनिक-निजी साझेदारी के आधार पर राज्‍यों और शहरी स्‍थानीय निकायों के द्वारा पर्याप्‍त निजी निवेश को भी जुटाया जाएगा।
SOURCE - PIB

Follow by Email

Google+ Followers

Daily Horoscopes