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बिहार के एक गांव में घर-घर दशरथ मांझी, अपने बूते ऐसे खड़ा कर दिया पुल


गया के दशरथ मांझी ने अपने बल पर पहाड़ काटकर सड़क बना दी थी। लेकिन मधुबनी के एक गांव में घर-घर में ऐसे दशरथ मांझी हैं। उन्होंने भी अपने बल पर जन सहयोग व श्रमदान के बल पर पुल खड़ा कर दिया है। 

हम बात कर रहे हैं मधुबनी जिला मुख्यालय से सटे रहिका प्रखंड की खजुरी पंचायत का अकशपुरा गांव की। बीते पांच दशक से यहां आवागमने के लिए जीबछ नदी पर पुल की गुहार अनसुनी थी। मार्ग के अभाव में ग्रामीणों के समक्ष बहुतेरी दुश्वारियां थीं। हर साल बाढ़ में 50 हजार की आबादी प्रभावित होती थी। आखिरकार आम जनता ने 'अपना हाथ जगन्नाथ' की कहावत को चरितार्थ किया और चार महीने में ही नौ लाख की लागत से 75 फीट लंबा पुल बना डाला।


खुद पुल निर्माण का संकल्प लिया 

अकशपुरा के मुहाने पर बहने वाली जीबछ नदी पर हजारों खर्च कर ग्रामीण बांस की चचरी बनाते थे, जो खतरनाक होने के साथ एक-दो साल में टूट जाती थी। गए सालों में नदी पार करने में तीन ग्रामीण काल के गाल में समा चुके हैं। कंक्रीट पुल के लिए ग्रामीणों ने प्रखंड से लेकर जिला प्रशासन तक आवेदन दिया। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने खुद पुल निर्माण का संकल्प लिया। 

इसे लेकर अप्रैल में समाजसेवी ललित झा की अगुवाई में बैठक हुई। चंदे और श्रमदान से पुल निर्माण का निर्णय हुआ। कुछ ने नकद राशि दी तो कुछ ने निर्माण सामग्री मुहैया कराई। संयोजक बनाए गए ललित झा ने पुल की डिजाइन तैयार की। 

युद्धस्तर पर चार महीने में ही तकरीबन नौ लाख की लागत से 75 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा पुल तैयार हो गया। पुल चालू कर दिया गया है। अब आगे इसके सुदृढ़ीकरण के लिए ग्रामीण और राशि एकत्र कर श्रमदान से काम करेंगे। 



22 किमी की दूरी अब नौ किमी रह गई 

ग्रामीण दुर्गानंद झा, दैयन देवी, हरिश्चंद्र चौधरी और जयशंकर झा बताते हैं कि पहले गांव के सबसे निकट के रैयाम स्थित बाजार जाने के लिए 11 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। पुल बन जाने के बाद अब यह दूरी सिमटकर डेढ़ किमी रह गई है। पहले प्रखंड मुख्यालय रहिका जाने के लिए मधुबनी होकर करीब 22 किमी का सफर तय करना पड़ता था। यह दूरी अब नौ किमी रह गई है। बीमार व गर्भवती महिलाओं को रैयाम होकर दरभंगा या मधुबनी जिला मुख्यालय स्थित स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना भी आसान हो गया है। 

50 हजार लोगों को मिल रहा फायदा 

पुल का लाभ खजुरी पंचायत समेत बसुआरा, इजरा, नवटोलिया, रैयाम के तकरीबन 50 हजार लोगों को मिलेगा। इस बाबत रहिका के प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार दास ने कहा कि अकशपुरा के ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग और श्रमदान से पुल बनाकर मिसाल कायम की है। यह काम शासन-प्रशासन को भी सीख और संदेश है।

Source - Jagran 


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