Know Your Law Ep 1: पीस बॉन्ड क्या है? BNSS की धारा 126 के तहत मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ और नागरिकों के अधिकार
भारत में कानून केवल अपराध होने के बाद अपराधी को दंडित करने के लिए ही नहीं बनाया गया है, बल्कि कुछ परिस्थितियों में संभावित अपराध और सार्वजनिक शांति भंग होने से रोकने के लिए भी कानूनी व्यवस्था की गई है। इसी उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS) में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बॉन्ड (Security for Keeping Peace) का प्रावधान किया गया है।
आम बोलचाल में इसे पीस बॉन्ड (Peace Bond) कहा जाता है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) किसी ऐसे व्यक्ति को नोटिस जारी कर सकता है, जिसके संबंध में उपलब्ध सूचना से यह आशंका हो कि वह शांति भंग कर सकता है या सार्वजनिक शांति एवं व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कोई कार्य कर सकता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत मिलते ही उसे बॉन्ड भरने के लिए बाध्य किया जा सकता है। कानून ने इस कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया, जाँच और नागरिकों को सुनवाई का अवसर देने की व्यवस्था की है।
दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की याचिका पर आया अक्टूबर 2026 का निर्णय इस कानूनी व्यवस्था को समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
### 1\. पीस बॉन्ड क्या होता है?
पीस बॉन्ड एक लिखित कानूनी वचन (Legal Undertaking) है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन देता है।
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